सिसैया खुर्द में गरमाया मामला: ग्रामीणों ने धौरहरा विधायक का पुतला फूंका, पुलिस पर पिटाई के आरोपों के बाद बढ़ा आक्रोश
लखीमपुर खीरी। धौरहरा क्षेत्र के सिसैया खुर्द गांव में सड़क, जलभराव और विकास कार्यों को लेकर शुरू हुआ ग्रामीणों का विरोध अब पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को गांव में ग्रामीणों ने धौरहरा विधायक विनोद शंकर अवस्थी का पुतला फूंका। इस दौरान विधायक, ग्राम प्रधान और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने के बाद पुलिस ने रात में घरों में घुसकर ग्रामीणों के साथ मारपीट की।
मामले की शुरुआत गांव में लंबे समय से खराब रास्ते और जलभराव की समस्या को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन से हुई। ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को लेकर प्रदर्शन करते हुए ‘काम नहीं तो वोट नहीं’ का बैनर लगाया था। प्रदर्शन के दौरान ग्राम प्रधान और विधायक के खिलाफ नारेबाजी भी हुई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में ग्रामीणों द्वारा विधायक और प्रधान के खिलाफ लगाए गए नारों की पुष्टि हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदर्शन के बाद 14 सितंबर की देर रात गांव में पुलिस पहुंची और कई घरों में घुसकर महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और अन्य ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान गांव की बिजली बंद करा दी गई थी। उनके अनुसार घटना में करीब 16 लोग घायल हुए, जिन्हें एंबुलेंस से धौरहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। इन आरोपों में मुन्नू देवी, शकुंतला, राधारानी, कृष्णा देवी, राजेंद्र, राम मित्र और तीर्थराम समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की यह कार्रवाई उनके द्वारा विधायक और ग्राम प्रधान के खिलाफ किए गए विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी थी। कुछ ग्रामीणों ने विधायक विनोद शंकर अवस्थी पर पुलिस के जरिए ग्रामीणों को पिटवाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, यह आरोप अभी जांच का विषय है और पुलिस ने इन आरोपों को तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है।

मामले में पुलिस की ओर से कहा गया है कि गांव में मारपीट की सूचना मिली थी और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीणों द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों की भी अलग से जांच कराए जाने की जानकारी सामने आई है। एएसपी पूर्वी पवन कुमार गौतम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों के बयान लिए, जबकि अधिकारियों ने भी मामले की जानकारी ली।
इसी बीच 14 सितंबर की घटना को लेकर एक अलग शिकायत के आधार पर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। रिपोर्ट के अनुसार इसमें तीन नामजद और तीन अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता ने घर में घुसकर महिलाओं समेत लोगों से मारपीट का आरोप लगाया है। मामले की विवेचना जारी है।
मामला बढ़ने के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता भी गांव पहुंचकर ग्रामीणों से मिले और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। ग्रामीणों ने भी अपनी मांगों और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर अधिकारियों से शिकायत की है।
गुरुवार को पुतला दहन के दौरान ग्रामीणों ने विधायक और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने गांव की सड़क और मूलभूत सुविधाओं के लिए आवाज उठाई थी, लेकिन इसके बाद उनके साथ कथित मारपीट की गई। अब ग्रामीण पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल सिसैया खुर्द का यह मामला गांव की विकास संबंधी समस्याओं से निकलकर पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक विवाद तक पहुंच चुका है। पुतला दहन के बाद मामला और गरम हो गया है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्य ही यह स्पष्ट करेंगे कि 14 सितंबर की रात की घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

