लखीमपुर खीरी: चार दिनों में तीसरा तेंदुआ पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
लखीमपुर खीरी। उत्तर निघासन वन रेंज के अंतर्गत डंडूरी गांव में बुधवार सुबह वन विभाग को एक और बड़ी सफलता मिली। कई दिनों से गांव और आसपास के खेतों में घूम रहे तेंदुए को वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में सुरक्षित पकड़ लिया गया। पिछले चार दिनों में यह तीसरा तेंदुआ है, जिसे वन विभाग ने रेस्क्यू अभियान के दौरान पकड़ा है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, हालांकि क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
डंडूरी गांव के लोगों का कहना है कि बीते कई दिनों से तेंदुआ गन्ने के खेतों और आबादी के आसपास दिखाई दे रहा था। इसके चलते किसान खेतों में जाने से डर रहे थे और बच्चों को भी घरों से अकेले बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा था। ग्रामीणों की सूचना के बाद वन विभाग ने गांव के पास रणनीतिक स्थान पर पिंजरा लगाया और उसमें एक बकरी को चारे के रूप में बांधा गया। देर रात शिकार के लालच में तेंदुआ पिंजरे के भीतर पहुंच गया और सुरक्षित रूप से कैद हो गया।


सुबह जैसे ही तेंदुए के पिंजरे में फंसने की खबर फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए वन विभाग की टीम ने लोगों को पिंजरे से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। पिंजरे में बंद तेंदुआ लगातार दहाड़ता और गुर्राता रहा, जिससे वहां मौजूद लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ भय का माहौल भी देखने को मिला।
वन विभाग के अनुसार उत्तर निघासन वन रेंज के गांवों में इस वर्ष तेंदुओं की गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अब तक तेंदुओं के हमलों में तीन बच्चों सहित पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई लोग घायल भी हुए हैं। माना जा रहा है कि दुधवा टाइगर रिजर्व से निकलकर तेंदुए भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में गन्ने के घने खेतों तक पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
वन अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र से अब तक करीब 12 तेंदुओं को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ा जा चुका है। इसके बावजूद लगातार नए तेंदुओं के गांवों की ओर आने से यह स्पष्ट हो रहा है कि समस्या अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विभाग ग्रामीणों को सतर्क रहने, रात के समय अकेले खेतों में न जाने और किसी भी वन्यजीव की सूचना तत्काल वन विभाग को देने की सलाह दे रहा है।
रेजर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पकड़े गए तेंदुए को पहले वन विभाग के रेंज कार्यालय ले जाया जाएगा। वहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण और मेडिकल जांच कराई जाएगी। यदि तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया जाता है, तो उसे वन विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किसी सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह प्राकृतिक वातावरण में लौट सके।


वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने के खेत तेंदुओं के लिए अस्थायी आश्रय का काम करते हैं। ऐसे में फसल कटाई के मौसम और भोजन की तलाश के दौरान उनके गांवों की ओर आने की संभावना बढ़ जाती है। इस स्थिति से निपटने के लिए वन विभाग को रेस्क्यू अभियान के साथ-साथ ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता है।
फिलहाल डंडूरी गांव में तेंदुए के पकड़े जाने से लोगों ने राहत जरूर महसूस की है, लेकिन क्षेत्र में वन्यजीवों की लगातार बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए ग्रामीणों में सतर्कता अभी भी बनी हुई है। वन विभाग ने भरोसा दिलाया है कि प्रभावित इलाकों में निगरानी जारी रहेगी और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

By LAVKUSH KUMAR MAURYA

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