प्रयागराज में 20 साल पुराना पार्क कब्जा मामला फिर गरमाया, आजम खान का नाम चर्चा में; CM योगी के निर्देश पर SIT जांच
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में करीब 20 साल पुराने पार्क की जमीन पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। दरियाबाद मोहल्ले में पार्क की जमीन और उससे लगी सड़क पर कब्जे से जुड़े इस पुराने मामले की अब नए सिरे से जांच होगी। मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का नाम भी सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया है।
बताया जा रहा है कि विवादित जमीन की मौजूदा कीमत करीब 4 करोड़ रुपये आंकी गई है। SIT का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि करीब दो दशक पहले सरकारी/सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर कथित कब्जे की शुरुआत कैसे हुई, उस समय किन लोगों की भूमिका रही और संबंधित विभागों के स्तर पर क्या कार्रवाई हुई थी।

2006 के मामले की अब दोबारा होगी जांच
मामला वर्ष 2006 का बताया जा रहा है। उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और आजम खान प्रदेश सरकार में नगर विकास मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आरोप है कि अगस्त 2006 में लगातार तीन दिन की सार्वजनिक छुट्टियों के दौरान दरियाबाद इलाके में पार्क की जमीन पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में माफिया अतीक अहमद से जुड़े लोगों के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और उस समय किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, यह अब SIT की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल किसी भी व्यक्ति की भूमिका को जांच पूरी होने से पहले अंतिम रूप से दोषी मानना उचित नहीं होगा।
तीन सदस्यीय SIT करेगी जांच
मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल में एडीएम सिटी सत्यम कुमार मिश्र, PDA सचिव विनीत कुमार सिंह और DCP सिटी मनीष शांडिल्य को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। टीम पुराने रिकॉर्ड, जमीन से संबंधित दस्तावेज, राजस्व अभिलेख और उस समय हुई प्रशासनिक कार्रवाई की पड़ताल कर सकती है।
SIT यह भी जांच करेगी कि जिस जमीन को पार्क के लिए इस्तेमाल किया जाना था, वहां कब्जा किस तरह हुआ और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उस समय जमीन को लेकर कोई शिकायत, कार्रवाई या सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव हुआ था या नहीं।
चार करोड़ की संपत्ति पर क्यों बढ़ी हलचल?
दरियाबाद में जिस संपत्ति को लेकर मामला सामने आया है, उसकी वर्तमान कीमत करीब चार करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतने मूल्य की सार्वजनिक जमीन से जुड़े पुराने मामले के दोबारा खुलने से प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है।
मामले में जमीन और उससे जुड़ी सड़क दोनों का उल्लेख सामने आया है। जांच के दौरान प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास करेगा कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व क्या था और कथित कब्जे के बाद वहां किस प्रकार का उपयोग या निर्माण हुआ।
20 साल बाद खुली पुरानी फाइल
करीब दो दशक पुराने मामले को दोबारा जांच के लिए खोले जाने से यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने वर्षों तक यह प्रकरण लंबित क्यों रहा। SIT की जांच में पुराने दस्तावेजों और अधिकारियों की भूमिका सामने आने के बाद इस सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद है।
प्रयागराज में अतीक अहमद और उससे जुड़े लोगों की कथित बेनामी संपत्तियों की जांच को लेकर प्रशासन पहले भी SIT गठित कर चुका है। ऐसे में दरियाबाद के इस पुराने पार्क मामले की जांच भी प्रशासन की जमीन कब्जे के खिलाफ चल रही कार्रवाई के व्यापक क्रम में देखी जा रही है।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल SIT के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2006 में पार्क की जमीन पर कथित कब्जा कैसे हुआ और इसमें किस-किस की भूमिका थी। जांच के दौरान पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्य जुटाए जाएंगे।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल करीब 20 साल पुराने इस जमीन विवाद के दोबारा खुलने से प्रयागराज की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

