लखीमपुर में फिर पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, 13वीं गिरफ्तारी से ग्रामीणों को राहत; मेडिकल जांच के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा
लखीमपुर खीरी। जिले में तेंदुओं की बढ़ती सक्रियता के बीच वन विभाग को एक और बड़ी सफलता मिली है। धौरहरा टाइगर रिजर्व से सटे ग्रामीण इलाकों में लगातार दहशत का कारण बने एक और तेंदुए को पिंजरे में कैद कर लिया गया है। रविवार रात लठुआ गांव में तेंदुए के पिंजरे में फंसने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बताया जा रहा है कि जनवरी से अब तक वन विभाग की टीम 13 तेंदुओं को पकड़ चुकी है।
तेंदुए के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद गांव और आसपास के इलाके में लोगों ने राहत महसूस की है। लंबे समय से तेंदुओं की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ था। खासकर रात के समय लोग घरों से बाहर निकलने में सावधानी बरत रहे थे और खेतों की ओर जाने से भी बच रहे थे।
लठुआ गांव में पिंजरे में फंसा तेंदुआ
जानकारी के मुताबिक रविवार रात लठुआ गांव में वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरे में एक तेंदुआ कैद हो गया। तेंदुए के पिंजरे में फंसने के बाद मौके पर पहुंची टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से कब्जे में लिया। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने आगे की प्रक्रिया शुरू की।
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग पहले से ही प्रभावित इलाकों में निगरानी और रेस्क्यू अभियान चला रहा है। जिन स्थानों पर तेंदुए की गतिविधियां लगातार देखी जा रही थीं, वहां पिंजरे लगाए गए थे। इसी अभियान के दौरान यह तेंदुआ भी वन विभाग की पकड़ में आया।
जनवरी से अब तक 13 तेंदुए पकड़े गए
क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे तेंदुए के मामलों ने वन विभाग की चुनौती बढ़ा दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जनवरी से अब तक कुल 13 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है। इनमें से कई तेंदुए ग्रामीण आबादी के आसपास लगातार दिखाई दे रहे थे।
लखीमपुर खीरी का बड़ा हिस्सा जंगल और वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। जिले में दुधवा टाइगर रिजर्व होने के कारण वन्यजीवों की मौजूदगी स्वाभाविक है, लेकिन जब जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों में पहुंचने लगते हैं तो इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है।
तेंदुए के हमलों से ग्रामीणों में बढ़ा डर
स्क्रीनशॉट में दी गई जानकारी के अनुसार, जनवरी से अब तक तेंदुए के हमलों में पांच लोगों की मौत का उल्लेख किया गया है। इन घटनाओं के बाद ग्रामीण इलाकों में तेंदुए को लेकर भय और चिंता और ज्यादा बढ़ गई है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों, बुजुर्गों और खेतों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर रहती है। कई गांवों में लोग रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचते हैं। तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिलने पर ग्रामीण समूह बनाकर सतर्क रहते हैं।
मेडिकल जांच के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा
पिंजरे में कैद किए गए तेंदुए को अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत मेडिकल परीक्षण से गुजारा जाएगा। स्वास्थ्य जांच के बाद वन विभाग के अधिकारी आगे का निर्णय लेंगे। जानकारी के मुताबिक स्वस्थ पाए जाने पर तेंदुए को उपयुक्त जंगल क्षेत्र में छोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
वन विभाग के सामने चुनौती यह भी है कि रेस्क्यू किए गए वन्यजीव को सुरक्षित तरीके से ऐसे स्थान पर छोड़ा जाए, जहां उसके कारण दोबारा मानव आबादी में खतरा पैदा न हो।
ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील
तेंदुए के पकड़े जाने के बावजूद वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि एक तेंदुए के पकड़े जाने का मतलब यह नहीं है कि इलाके में मौजूद सभी तेंदुओं का खतरा समाप्त हो गया है।
ग्रामीणों से अपील की जाती है कि वे रात के समय अकेले जंगल या खेत की ओर न जाएं, बच्चों को सुनसान स्थानों पर न भेजें और तेंदुए की कोई गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
लखीमपुर खीरी में एक और तेंदुए के पिंजरे में कैद होने से फिलहाल ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। अब मेडिकल जांच और वन विभाग की आगे की कार्रवाई के बाद यह तय होगा कि तेंदुए को किस जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वहीं, इलाके में तेंदुओं की लगातार मौजूदगी को देखते हुए निगरानी अभियान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।


