ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ा बदलाव! 125 दिन रोजगार और ₹300 मजदूरी पर जोर, पंच सम्मेलन में डीएम ने दिए निर्देश
लखीमपुर खीरी, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, परिवारों की आय को मजबूत करने और गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देने को लेकर लखीमपुर खीरी में महत्वपूर्ण पंच सम्मेलन आयोजित किया गया। कलेक्ट्रेट स्थित अटल सभागार में हुए सम्मेलन में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 से जुड़े प्रावधानों और पंचायतों की जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई।
प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के कानूनी गारंटी वाले मजदूरी रोजगार का प्रावधान किया गया है। इसके साथ मजदूरी के समयबद्ध भुगतान, बेरोजगारी भत्ता, डिजिटल निगरानी और ग्राम पंचायतों की अधिक प्रभावी भूमिका पर भी जोर दिया गया है। सम्मेलन में अधिकारियों ने पंचायत प्रतिनिधियों से योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ सम्मेलन का शुभारंभ
पंच सम्मेलन का शुभारंभ डीएम अंजनी कुमार सिंह, सीडीओ अभिषेक कुमार और ब्लॉक प्रमुख बीना राज ने पीडी सतीश कुमार पाण्डेय तथा डीडीओ गजेंद्र प्रताप सिंह के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का समन्वय एवं संचालन उपायुक्त श्रम रोजगार अमित कुमार परिहार ने किया।
सम्मेलन में ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। पंचायत प्रतिनिधियों को बताया गया कि रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऐसे कार्यों का चयन किया जाना चाहिए, जिनसे गांव की मौजूदा समस्याओं का समाधान हो और लंबे समय तक ग्रामीणों को उसका लाभ मिलता रहे।
गांव की जरूरत के हिसाब से चुने जाएं काम: डीएम
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि रोजगार योजना का उद्देश्य केवल मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा और गांवों का समग्र विकास भी सुनिश्चित होना चाहिए।

उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि योजना की जानकारी प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाई जाए और जरूरतमंद लोगों को नियमानुसार रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीरता से काम किया जाए। उन्होंने जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे, आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों और आपदा प्रबंधन जैसे उपयोगी कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
डीएम ने कार्यों के चयन से लेकर उनकी स्वीकृति, मस्टर रोल और मजदूरी भुगतान तक हर स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी लोगों तक पहुंचेगा, जब क्रियान्वयन में जवाबदेही और समयबद्धता दिखाई दे।
रोजगार के साथ स्थायी आजीविका पर फोकस
सीडीओ अभिषेक कुमार ने कहा कि ग्रामीण विकास को केवल अस्थायी रोजगार तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। गांवों में ऐसी परिसंपत्तियां विकसित की जानी चाहिए, जो भविष्य में भी लोगों की आय और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करें।
उन्होंने पंचायतों से जल संरक्षण, कृषि, आजीविका, बुनियादी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को स्थानीय जरूरतों के आधार पर प्राथमिकता देने को कहा। साथ ही पीएम गति शक्ति और जियोस्पेशियल तकनीक के इस्तेमाल से विकास योजनाओं में बेहतर समन्वय की बात कही।

डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता
सम्मेलन में योजना के क्रियान्वयन में तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, जियो-रेफरेंसिंग, रियल-टाइम डैशबोर्ड और एआई आधारित निगरानी जैसी तकनीकों के जरिए कार्यों और भुगतान की निगरानी को मजबूत करने की बात कही गई।
अधिकारियों ने सोशल ऑडिट और सार्वजनिक प्रकटीकरण को भी जवाबदेही का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। महिला भागीदारी बढ़ाने, महिला मुखिया वाले परिवारों को प्राथमिकता देने तथा कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे प्रावधानों की भी जानकारी दी गई।
125 दिन रोजगार, ₹300 मजदूरी पर जोर
जिला प्रशिक्षण अधिकारी मनीष चंद्रा ने पंचायत प्रतिनिधियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि रोजगार के साथ गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है।
उन्होंने पंचायतों से अपील की कि कार्ययोजना बनाते समय गांव की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखा जाए। जल, कृषि, आजीविका और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देकर रोजगार के साथ विकास को भी आगे बढ़ाया जाए।
पंच सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साथ बेहतर आजीविका और गांवों को टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाए। अब इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों और संबंधित विभागों पर होगी।

