नेपाल में बाढ़ से तबाही और नुवाकोट में राहत बचाव अभियाननेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद नुवाकोट, रसुवा और त्रिशूली क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान जारी।

नेपाल में बाढ़ का कहर और बढ़ा, एक ही घर से मिले 24 शव; 987 मौतें, 3,916 लोग अब भी लापता

काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। बाढ़, मलबे और भूस्खलन के बाद अब जैसे-जैसे राहत और खोज अभियान आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे तबाही की भयावह तस्वीर सामने आ रही है। मंगलवार 1 सितंबर तक सामने आए ताजा अपडेट के मुताबिक नेपाल में मृतकों की संख्या करीब 987 तक पहुंच गई है, जबकि 3,916 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों द्वारा आंकड़ों के सत्यापन के कारण मृतकों की संख्या में अंतर दिखाई दे रहा है और कुछ रिपोर्टों में आंकड़ा 1,000 से अधिक बताया गया है।

सबसे दर्दनाक तस्वीर नुवाकोट जिले के बेत्रावती इलाके से सामने आई है, जहां बचाव दलों ने बाढ़ प्रभावित एक ही घर के अंदर से 24 शव बरामद किए हैं। यह घर बिदुर नगरपालिका-10 के बेत्रावती क्षेत्र में बताया गया है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार बरामद शवों में 13 महिलाएं और 11 पुरुष शामिल हैं। पुलिस और बचाव दल अभी भी घटनास्थल पर तलाशी अभियान जारी रखे हुए हैं और आशंका है कि मलबे के अंदर और भी शव या लोग फंसे हो सकते हैं।

राहत और बचाव अभियान लगातार जारी

नेपाल की सेना, पुलिस और अन्य बचाव दल बाढ़ से तबाह इलाकों में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। कई स्थानों पर सड़कें और पुल बह जाने के कारण राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अस्थायी पुल बनाए जा रहे हैं और हेलीकॉप्टरों के जरिए भी राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं बिजली और संचार व्यवस्था को कुछ प्रभावित इलाकों में दोबारा बहाल करने का काम भी शुरू हो गया है। हालांकि कई इलाके अभी भी पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाए हैं।

हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों पर सबसे ज्यादा फोकस

बाढ़ के बाद नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाएं सबसे बड़े बचाव केंद्रों में बदल गई हैं। करीब 12 हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े लगभग 900 लोगों के लापता होने की चिंता जताई गई है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जिनके सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है।

रेस्क्यू टीमों के लिए इन सुरंगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है क्योंकि अंदर कीचड़, पानी और मलबा भरा हुआ है। भारत की विशेषज्ञ टीम भी नेपाल पहुंचकर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में सहयोग कर रही है। भारतीय तकनीकी टीमों ने चिलिमे और लांगटांग की सुरंगों में खोज अभियान आगे बढ़ाया है और एक टीम करीब 185 मीटर अंदर तक पहुंच चुकी है।

भारत ने 158 नागरिकों को सुरक्षित निकाला

नेपाल की इस भीषण आपदा के बीच भारत भी लगातार राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 158 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर नेपाल से बाहर लाया जा चुका है। भारत की ओर से सुरंग बचाव विशेषज्ञों के साथ राहत सामग्री और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

भारत और नेपाल की टीमें मिलकर प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। दोनों देशों के बीच यह संयुक्त अभियान कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में चलाया जा रहा है।

दक्षिण कोरिया की 44 सदस्यीय टीम भी पहुंचेगी

नेपाल सरकार की मांग के बाद दक्षिण कोरिया ने भी 44 सदस्यीय आपदा राहत एवं बचाव टीम भेजने का फैसला किया है। यह टीम विशेष रूप से खोज एवं बचाव अभियान में मदद करेगी। दक्षिण कोरिया के कुछ नागरिक भी बाढ़ के बाद लापता बताए गए हैं और वहां के विशेषज्ञ उनकी तलाश में भी सहयोग कर रहे हैं।

चीन समेत अन्य देशों के विशेषज्ञ भी नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में तकनीकी सहायता दे रहे हैं। अब नेपाल ने सुरंग बचाव, फोरेंसिक जांच, डीएनए परीक्षण, शवों के संरक्षण और दूरस्थ इलाकों की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग स्वीकार करना शुरू कर दिया है।

बाढ़ ने तबाह कर दिया बुनियादी ढांचा

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के सड़क, पुल, बिजली, संचार और जलविद्युत ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में पूरा संपर्क टूट गया था। अब बचाव दल अस्थायी पुलों और मशीनरी की मदद से रास्ते खोलने में जुटे हैं।

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नेपाल सरकार के सामने अब राहत के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती भी है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस आपदा के बाद पुनर्निर्माण की लागत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है।

लापता लोगों के परिवारों की उम्मीदें कायम

नेपाल में अभी भी हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में हैं। बेत्रावती में एक ही घर से 24 शव मिलने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। राहत दलों का कहना है कि मलबे और सुरंगों की तलाशी पूरी होने के बाद ही इस आपदा में हुई वास्तविक जनहानि का सही आंकड़ा सामने आ पाएगा।

फिलहाल नेपाल में खोज, बचाव और राहत अभियान युद्धस्तर पर जारी है। मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बदल रही है, इसलिए आधिकारिक सत्यापन के साथ आंकड़ों को अपडेट किया जा रहा है। नेपाल की इस भयावह त्रासदी ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और जलवायु जोखिम को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

By LAVKUSH KUMAR MAURYA

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