पढ़ुआ थाना श्रीकृष्ण भक्ति में सराबोर, धूमधाम से मनाई गई जन्माष्टमी; दोनों विधायक और थाना प्रभारी रहे मौजूद
पढ़ुआ/लखीमपुर-खीरी। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पढ़ुआ थाना परिसर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। थाना परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और विधि-विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अर्चन कर जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में 141 विधानसभा धौरहरा के विधायक विनोद शंकर अवस्थी और 138 विधानसभा निघासन के विधायक शशांक वर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम का आयोजन थाना प्रभारी मोहित पुंडीर के नेतृत्व में किया गया। सर्वप्रथम थाना प्रभारी मोहित पुंडीर और दोनों माननीय विधायकों ने विधि-विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अर्चन किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और पूरा थाना परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
रातभर चलता रहा भजन-कीर्तन
जन्माष्टमी के अवसर पर पढ़ुआ थाना परिसर में पूरी रात भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। बाहर से आए कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा से जुड़े भजन और धार्मिक प्रस्तुतियां दीं। देर रात तक श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए। वातावरण में श्रीकृष्ण के भजनों और जयकारों की गूंज बनी रही।
कार्यक्रम में भाजपा नेता एवं मंडल अध्यक्ष नत्थूलाल मौर्य सहित क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु कार्यक्रम में पहुंचे। बताया गया कि कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया, जबकि क्षेत्र के कई पत्रकार भी मौके पर मौजूद रहे और जन्माष्टमी कार्यक्रम को कवर किया।
श्रीकृष्ण जन्म की कथा से जुड़ा रहा पूरा आयोजन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय मथुरा में हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अत्याचारी राजा कंस के कारागार में देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में हुआ। मान्यता है कि कंस को आकाशवाणी के माध्यम से देवकी के आठवें पुत्र से अपनी मृत्यु का संकेत मिला था, जिसके बाद उसने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया था।

श्रीकृष्ण के जन्म के बाद वासुदेव उन्हें लेकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचे, जहां उनका पालन-पोषण नंद बाबा और माता यशोदा के स्नेह में हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे चलकर कंस का वध किया और धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसी पौराणिक प्रसंग को याद करते हुए जन्माष्टमी पर मंदिरों और धार्मिक स्थलों के साथ-साथ कई स्थानों पर झांकियां, भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और रात्रि जागरण आयोजित किए जाते हैं।
पुलिस थाने में दिखा भक्ति और आस्था का अनोखा संगम
पढ़ुआ थाना परिसर में आयोजित जन्माष्टमी समारोह में पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की सहभागिता ने कार्यक्रम को खास बना दिया। थाना परिसर में देर रात तक धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे और पूरा वातावरण श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन नजर आया।
इस दौरान “जय श्रीकृष्ण” और “राधे-राधे” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने थाना प्रभारी मोहित पुंडीर के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक आयोजन की सराहना की। जन्माष्टमी का यह कार्यक्रम क्षेत्र में धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और आपसी सौहार्द का संदेश देता नजर आया।
पढ़ुआ थाना परिसर में देर रात तक चले भजन-कीर्तन के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह आयोजन श्रद्धा और उत्साह के बीच संपन्न हुआ।


