लखीमपुर खीरी में कथित बिना पंजीकरण चल रहे अस्पताल में नवजात की मौत, पिता ने डीएम-सीएमओ से लगाई कार्रवाई की गुहार
लखीमपुर खीरी। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। नौरंगाबाद मार्ग पर सलेमपुर स्थित कोन पॉलिटेक्निक के पास संचालित बताए जा रहे जानकी अस्पताल में इलाज के दौरान एक नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद मृतक बच्चे के पिता ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों के अनुसार, ग्राम सिरैचा, थाना खीरी निवासी जितेंद्र सिंह अपने नवजात बच्चे के इलाज के लिए उक्त अस्पताल पहुंचे थे। इलाज के दौरान बच्चे की हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। बच्चे की मौत से आहत पिता ने अस्पताल में इलाज के दौरान हुई कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए हैं।
अस्पताल के पंजीकरण को लेकर भी उठे सवाल
मृतक नवजात के पिता जितेंद्र सिंह का आरोप है कि जिस अस्पताल में उनके बच्चे का उपचार कराया जा रहा था, वह कथित तौर पर बिना पंजीकरण के संचालित हो रहा था। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह और सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता को फोन के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी दी।

परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल के संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए और यदि अस्पताल बिना आवश्यक अनुमति या पंजीकरण के संचालित पाया जाता है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
बच्चे के पिता ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों की कथित लापरवाही के कारण उनके नवजात की जान चली गई। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज के दौरान किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।
घटना के बाद परिवार ने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि जांच के दौरान अस्पताल में मौजूद चिकित्सकीय सुविधाओं, इलाज से संबंधित रिकॉर्ड और बच्चे की उपचार प्रक्रिया की भी पड़ताल की जानी चाहिए।
प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश
मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन की ओर से जांच के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। जांच टीम अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकीय व्यवस्थाओं और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर सकती है।

इसके अलावा नवजात के इलाज से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच का अहम हिस्सा हो सकते हैं। विभागीय जांच के बाद ही यह तय होगा कि अस्पताल नियमों के अनुसार संचालित हो रहा था या नहीं और बच्चे के उपचार में किसी प्रकार की अनियमितता अथवा लापरवाही हुई थी या नहीं।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
नवजात की मौत के इस मामले ने जिले में निजी अस्पतालों के संचालन और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर नवजात और गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान अस्पतालों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं और प्रशिक्षित चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच का इंतजार है। अधिकारियों द्वारा अस्पताल के दस्तावेजों और उपचार संबंधी रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। यदि जांच में अस्पताल के संचालन में नियमों का उल्लंघन या इलाज में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं, नवजात की मौत से परिवार में गम का माहौल है। बच्चे के पिता जितेंद्र सिंह ने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के बाद ही आगे की तस्वीर साफ होगी।

