लखीमपुर खीरी में नशे के नेटवर्क पर डीएम-एसपी सख्त, सीमावर्ती इलाकों से मेडिकल स्टोर तक कसेगा शिकंजा
लखीमपुर खीरी। जिले में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और नशे के बढ़ते नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन और पुलिस ने अब व्यापक अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक डॉ. खयाती गर्ग की अध्यक्षता में जिला स्तरीय नारकोटिक्स कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नशीले पदार्थों के अवैध निर्माण, परिवहन और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में अधिकारियों ने साफ किया कि जिले में नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन की प्राथमिकता नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर रोक लगाने के साथ-साथ उन स्थानों और लोगों की पहचान करना है, जहां से इस तरह के कारोबार को बढ़ावा मिलने की आशंका है।
गुप्त सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नशीले पदार्थों की अवैध गतिविधियों से संबंधित कोई भी गोपनीय या महत्वपूर्ण सूचना मिलने पर उसे संबंधित विभागों के बीच तत्काल साझा किया जाए। सूचना के आधार पर बिना अनावश्यक देरी के प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
डीएम ने पिछली बैठकों में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण के लिए केवल एक विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पुलिस, प्रशासन, आबकारी, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों को मिलकर लगातार अभियान चलाना होगा।
सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त कार्रवाई पर जोर
लखीमपुर खीरी की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीमावर्ती और वन क्षेत्रों में पुलिस तथा संबंधित विभागों की संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी रखी जाए।
सीमा से नशीले पदार्थों की संभावित आवाजाही पर निगरानी बढ़ाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क की कड़ियों तक पहुंचने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया जाए।
मेडिकल स्टोरों की होगी सघन चेकिंग
बैठक में मेडिकल स्टोरों पर भी विशेष निगरानी रखने का फैसला किया गया। औषधि प्रशासन विभाग को जिले में मेडिकल स्टोरों की सघन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष रूप से ऐसी दवाओं की बिक्री पर नजर रखने को कहा गया है, जिनका गलत इस्तेमाल नशे के लिए किया जा सकता है। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि नशीली अथवा नियंत्रित श्रेणी की दवाओं की बिक्री निर्धारित नियमों और चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही हो।
मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा दवाओं की बिक्री का निर्धारित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और नियमों का पालन करने पर भी जोर दिया गया। जांच के दौरान यदि किसी मेडिकल स्टोर पर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नशे से युवाओं को बचाने के लिए चलेगा जागरूकता अभियान
बैठक में नशे की रोकथाम के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता को भी महत्वपूर्ण बताया गया। जिलाधिकारी ने युवाओं और विशेषकर छात्र-छात्राओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।

शिक्षा विभाग और जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को संयुक्त रूप से जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए गए। स्कूल-कॉलेजों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नशा विरोधी जागरूकता अभियान चलाने की योजना पर भी जोर दिया गया।
अपराध निरोधक एजेंसियों में बेहतर समन्वय
अधिकारियों को नशे के खिलाफ कार्रवाई में शामिल विभिन्न अपराध निरोधक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में कहा गया कि नशे का नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता, इसलिए इसकी पूरी श्रृंखला को समझकर कार्रवाई करना जरूरी है।
पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी, मेडिकल स्टोरों की जांच, सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त अभियान और युवाओं के बीच जागरूकता कार्यक्रमों को अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया जा रहा है।
प्रशासन का सख्त संदेश
बैठक से यह स्पष्ट है कि लखीमपुर खीरी प्रशासन नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। आने वाले दिनों में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में जांच और कार्रवाई तेज होने की संभावना है।
प्रशासन का उद्देश्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और आपूर्ति पर रोक लगाने के साथ युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना है। अब निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है और अवैध नेटवर्क पर कितनी कार्रवाई होती है, इस पर जिलेवासियों की नजर रहेगी।

