गांधी जयंती 2026: सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह से बदली आजादी की लड़ाई, जानिए महात्मा गांधी का पूरा संघर्ष
लखीमपुर खीरी। देश आज 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मना रहा है। सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने वाले महात्मा गांधी का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा। गांधी जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके सत्य, अहिंसा और मानवता के विचारों को समझने का अवसर भी है।
2 अक्टूबर 1869 को हुआ था जन्म
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। गांधी जी का विवाह वर्ष 1883 में कस्तूरबा गांधी से हुआ। उनके चार पुत्र थे—हरिलाल गांधी, मणिलाल गांधी, रामदास गांधी और देवदास गांधी।
उन्होंने राजकोट में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1888 में कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका में उनके जीवन और राजनीतिक विचारों को एक नई दिशा मिली।
दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह की शुरुआत
गांधी जी वर्ष 1893 में दक्षिण अफ्रीका गए, जहां भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ उन्होंने संघर्ष किया। 11 सितंबर 1906 को जोहान्सबर्ग में सत्याग्रह की एक महत्वपूर्ण शुरुआत हुई, जहां भारतीय समुदाय ने भेदभावपूर्ण कानून के विरोध में प्रतिरोध का संकल्प लिया। यहीं से सत्याग्रह गांधी जी के संघर्ष का प्रमुख माध्यम बनता गया।
भारत लौटकर स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा
गांधी जी वर्ष 1915 में भारत लौटे। इसके बाद उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा। वर्ष 1917 का चंपारण सत्याग्रह भारतीय धरती पर उनके प्रमुख आंदोलनों में शामिल रहा। इसके बाद 1918 में अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन और खेड़ा सत्याग्रह ने भी उनके संघर्ष को व्यापक बनाया।
गांधी जी का विश्वास था कि समाज के सबसे कमजोर और गरीब व्यक्ति के हित को ध्यान में रखे बिना देश की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। इसी सोच से उनके अंत्योदय के विचार को मजबूती मिली।
रॉलेट एक्ट और असहयोग आंदोलन
वर्ष 1919 में रॉलेट एक्ट के विरोध में गांधी जी ने देशव्यापी सत्याग्रह का आह्वान किया। इसी दौर में 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया।
इसके बाद 1 अगस्त 1920 को असहयोग आंदोलन शुरू हुआ। इस आंदोलन में सरकारी स्कूल-कॉलेज, अदालतों, सरकारी संस्थानों और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया गया। हालांकि चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधी जी ने फरवरी 1922 में आंदोलन वापस ले लिया।
नमक कानून के खिलाफ दांडी मार्च
अंग्रेजी शासन के नमक कानून के खिलाफ गांधी जी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी मार्च शुरू किया। लगभग 24 दिनों की यात्रा के बाद 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर उन्होंने नमक कानून तोड़ा। यह आंदोलन अंग्रेजी शासन के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बना।
भारत छोड़ो आंदोलन और ‘करो या मरो’
8 अगस्त 1942 को मुंबई में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ। गांधी जी ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का आह्वान करते हुए “करो या मरो” का संदेश दिया। 9 अगस्त को गांधी जी सहित कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद आंदोलन देश के विभिन्न हिस्सों में फैल गया।
30 जनवरी 1948 को हुई हत्या
गांधी जी की पत्नी कस्तूरबा गांधी का निधन 22 फरवरी 1944 को पुणे के आगा खान पैलेस में हुआ। इसके करीब चार वर्ष बाद 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में प्रार्थना सभा के दौरान नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी।
भारतीय नोटों पर गांधी जी की तस्वीर का इतिहास
भारतीय मुद्रा पर महात्मा गांधी की तस्वीर को लेकर भी लोगों में काफी रुचि रहती है। स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारतीय नोटों पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय प्रतीकों और अन्य चित्रों का इस्तेमाल किया जाता था। बाद में गांधी जी की तस्वीर भारतीय मुद्रा पर शामिल की गई और 1996 में महात्मा गांधी सीरीज के साथ उनकी तस्वीर नियमित रूप से नोटों की पहचान का हिस्सा बन गई।
आज गांधी जी की तस्वीर भारतीय मुद्रा पर दिखाई देती है, लेकिन उनके जीवन की सबसे बड़ी पहचान उनके विचार हैं—सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति संवेदना।
गांधी जयंती पर उन्हें याद करने का अर्थ केवल उनके जीवन की घटनाओं को दोहराना नहीं, बल्कि यह समझना भी है कि बिना हिंसा और नफरत के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का रास्ता भी समाज को बदलाव की दिशा दे सकता है।

