अनाथ नाबालिग बच्ची के घर और रास्ते को लेकर विवाद, पुलिसकर्मी पर लगाए गए गंभीर आरोप।अनाथ नाबालिग बच्ची के घर और रास्ते को लेकर विवाद, पुलिसकर्मी पर लगाए गए गंभीर आरोप।

पढ़ुवा थाने के दीवान पर गंभीर आरोप, अनाथ नाबालिग बच्ची के घर और रास्ते पर कब्जे की शिकायत से मचा हड़कंप

लखीमपुर खीरी। पढ़ुवा थाना क्षेत्र के दरेरी गांव से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक अनाथ नाबालिग बच्ची के घर और उसके आने-जाने के रास्ते को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बच्ची के पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि दबंग लोगों ने उसके घर के सामने ट्राली खड़ी कर रास्ता बाधित कर दिया है और घर तक पहुंचने वाले रास्ते पर कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है।

बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता की करीब दस वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है और उसकी मां भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसे में नाबालिग बच्ची के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ चुका है। आरोप है कि अब उसके आशियाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिससे बच्ची और उसके परिवार से जुड़े लोगों में चिंता का माहौल है।

घर जाने का रास्ता बंद करने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बच्ची के घर के सामने ट्राली खड़ी कर दी गई है, जिससे उसके लिए घर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा घर के सामने और रास्ते पर कथित कब्जे की भी बात कही जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी संपत्ति या रास्ते को लेकर विवाद है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए या नहीं।

बच्ची के पक्ष की ओर से पढ़ुवा थाने में तैनात दीवान गेंदालाल की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि पुलिसकर्मी द्वारा मामले की जांच प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

दो दिन पहले भी दबाव बनाने का आरोप

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, करीब दो दिन पहले बच्ची के आशियाने को लेकर उस पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। आरोप यह भी है कि बच्ची को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर करने का प्रयास किया जा रहा था।

मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की संपत्ति या घर पर कब्जे को लेकर विवाद है तो पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष जांच करने की होनी चाहिए।

क्या बिना न्यायालय के आदेश के हो सकता है कब्जा?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस किसी व्यक्ति के घर, जमीन या द्वार पर स्वयं किसी दूसरे पक्ष का कब्जा करवा सकती है? सामान्य तौर पर संपत्ति के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े विवादों का समाधान संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम न्यायालय/प्राधिकरण के माध्यम से किया जाता है। परिस्थितियों के अनुसार पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा संज्ञेय अपराध की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है, लेकिन किसी पक्ष को मनमाने तरीके से संपत्ति का मालिकाना हक दिलाना पुलिस का काम नहीं है।

निष्पक्ष जांच की मांग

इस पूरे मामले में अब स्थानीय लोगों की नजर थाना प्रभारी और उच्च पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि क्या नाबालिग बच्ची की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या बच्ची के घर और रास्ते की मौके पर जांच होगी? और यदि कब्जे या रास्ता बाधित करने की शिकायत सही पाई जाती है तो क्या नियमानुसार कार्रवाई होगी?

फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित पुलिस अधिकारियों और दूसरे पक्ष का बयान सामने आना भी महत्वपूर्ण है।

एक अनाथ नाबालिग बच्ची के घर से जुड़ा यह मामला केवल जमीन या रास्ते का विवाद नहीं, बल्कि उसके सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय भी है। ऐसे में जरूरत है कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि किसी पक्ष के साथ अन्याय हुआ है तो कानून के अनुसार उसे राहत दिलाई जाए।

By LAVKUSH KUMAR MAURYA

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