लखीमपुर में मोहाना नदी का कहर: 10 सेकेंड में नदी में समा गया मकान, जसनगर में तेज कटान से दहशत; घर तोड़कर सामान बचा रहे ग्रामीणमोहाना नदी के तेज कटान से जसनगर गांव में मकानों पर खतरा, सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे ग्रामीण।

लखीमपुर में मोहाना नदी का कहर: 10 सेकेंड में नदी में समा गया मकान, जसनगर में तेज कटान से दहशत; घर तोड़कर सामान बचा रहे ग्रामीण

लखीमपुर खीरी। भारत-नेपाल सीमा पर बहने वाली मोहाना नदी ने लखीमपुर खीरी के जसनगर गांव में तबाही मचानी शुरू कर दी है। नदी का जलस्तर घटने के बाद कटान की रफ्तार तेज हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि एक मकान महज 10 सेकेंड के भीतर नदी में समा गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तेज कटान के चलते मकान के नदी में ढहने का दृश्य दिखाई दे रहा है। पिछले दो दिनों में नदी तीन घरों को अपने आगोश में ले चुकी है। लगातार बढ़ते खतरे के बीच ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोग अपने आशियानों को खुद तोड़कर ईंट, लकड़ी और घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं।

जलस्तर घटते ही बढ़ी कटान की रफ्तार

जसनगर गांव में पिछले करीब छह दिनों से मोहाना नदी लगातार कटान कर रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, गिरिजा बैराज पर क्लोजर की कार्रवाई के बीच नदी का जलस्तर घटने के बाद कटान की गति और तेज हो गई है। नदी का रुख बदलने से किनारे बसे परिवारों के सामने घर और जमीन बचाने का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले नदी धीरे-धीरे किनारे की जमीन काट रही थी, लेकिन अब कटान इतनी तेजी से हो रहा है कि लोगों को अपने घर खाली करने तक का समय मुश्किल से मिल पा रहा है। देखते ही देखते मकानों की नींव कमजोर हो रही है और घर नदी में समाते जा रहे हैं।

तीन परिवारों के घर नदी में समाए, कई मकानों पर खतरा

ग्रामीणों के अनुसार, राजकुमार, जीवन और दिनेश के मकान नदी के कटान की चपेट में आ चुके हैं। इसके अलावा गोवर्धन, बालकराम, बनवारी, सेवकराम, मनोज कुमार, रमेश, काशी, छांगुर, रामवृक्ष, रामकरन, चंदन, उमेश, रामचंद्र, रामदुलारे, कमलेश और विधवा सुमित्रा समेत कई अन्य लोगों के मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।

नदी के लगातार करीब आने से ग्रामीणों को डर है कि अगर कटान इसी रफ्तार से जारी रहा तो उनके बचे हुए घर भी कभी भी नदी में समा सकते हैं। इसी आशंका के चलते कई परिवारों ने अपने मकान खुद तोड़ना शुरू कर दिया है। उनका उद्देश्य मकान की बची हुई सामग्री और जरूरी सामान को नदी की चपेट में आने से पहले सुरक्षित निकालना है।

घर तोड़कर सामान बचाने की मजबूरी

जसनगर में हालात ऐसे हो गए हैं कि जिन घरों को लोग वर्षों की मेहनत से बनाते हैं, उन्हें अब खुद अपने हाथों से तोड़ना पड़ रहा है। ग्रामीण ईंट, लकड़ी, अनाज, बिस्तर, बर्तन और अन्य घरेलू सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। कई परिवार अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं।

मोहाना नदी के तेज कटान से जसनगर गांव में मकानों पर खतरा, सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे ग्रामीण।

ग्रामीण गोवर्धन भी अपने मकान को बचाने और उपयोगी सामग्री निकालने के लिए उसे खुद तोड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि नदी का कटान जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसमें मकान के अचानक गिरने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में घर को बचाने की उम्मीद छोड़कर सामान सुरक्षित करना उनकी मजबूरी बन गई है।

रातभर जागकर नदी की निगरानी कर रहे परिवार

कटान प्रभावित जमुना देवी, रामकुमारी, रीमा, छोटी, फूलमती, रूपा और सुशीला ने बताया कि नदी के डर से रात में नींद नहीं आती। परिवार के सभी सदस्य दिन-रात नदी की तरफ नजर लगाए रहते हैं। हर समय यही चिंता बनी रहती है कि कहीं अगला नंबर उनके घर का न हो।

ग्रामीणों के मुताबिक, इस संकट का असर उनकी रोजी-रोटी पर भी पड़ रहा है। मजदूरी करके परिवार चलाने वाले लोग भी घर और परिवार की सुरक्षा की चिंता के कारण काम पर नहीं जा पा रहे हैं। घर उजड़ने का डर और भविष्य की अनिश्चितता लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रही है।

प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनकी समस्या पर शासन-प्रशासन की ओर से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीण चाहते हैं कि उन्हें तत्काल राहत मिले और कटान से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की व्यवस्था की जाए।

पंचायत में जमीन देने की मांग

लगातार बढ़ते कटान से परेशान ग्रामीणों ने पंचायत में रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मोहाना नदी के खतरे से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर उन्हें बसाया जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ स्थायी रूप से रह सकें। ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता अब मकान के साथ-साथ बच्चों, परिवार और जीवनभर की जमा-पूंजी को सुरक्षित रखने की है।

तहसील प्रशासन को भेजी गई रिपोर्ट

इस मामले में लेखपाल फूल सिंह ने बताया कि जसनगर गांव में नदी के कटान से तीन मकान प्रभावित हुए हैं। इसकी रिपोर्ट तहसील प्रशासन को भेज दी गई है। फिलहाल ग्रामीण नदी के कटान पर नजर रखे हुए हैं और अपने घरों से जरूरी सामान निकालने में जुटे हैं।

अब प्रभावित परिवारों को प्रशासन से राहत और सुरक्षित आवास की उम्मीद है। यदि कटान पर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो गांव के अन्य मकानों और परिवारों के सामने भी बेघर होने का संकट गहरा सकता है।

रिपोर्ट: लोक इनसाइट मीडिया

By LAVKUSH KUMAR MAURYA

"Lok Insight Media के माध्यम से हम देश-दुनिया, भारत, उत्तर प्रदेश, तकनीक, स्वास्थ्य और जनहित से जुड़ी ताजा खबरें पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। हमारा उद्देश्य सही और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है।"

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed