लखीमपुर खीरी/सिंगाही। सिंगाही क्षेत्र में पैतृक मकान को लेकर चल रहे विवाद ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद उसके मकान पर पुलिस की मौजूदगी में ताला लगा दिया गया, जिसके बाद उसे अपनी बेटी के साथ खुले आसमान के नीचे रहने की स्थिति का सामना करना पड़ा।
महिला का आरोप है कि मकान को लेकर विवाद पहले से न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में उसका कहना है कि मामले में अंतिम निर्णय अदालत को करना है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई से उसे और उसकी बेटी को अपने ही पैतृक घर से बाहर होना पड़ा।

पीड़िता के मुताबिक, विवाद के दौरान उसकी बेटी के साथ कथित तौर पर मारपीट भी की गई, लेकिन शिकायत के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। महिला का यह भी आरोप है कि न्याय की मांग करने पर उसे और उसके साथ मौजूद लोगों को देर रात तक थाने में बैठाए रखा गया।
महिला ने आरोप लगाया कि जब उसने पूरे मामले का वीडियो बनाकर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया, तो उसका मोबाइल फोन भी ले लिया गया। महिला का दावा है कि उससे यह लिखवाया गया कि वह उक्त मकान में नहीं रहेगी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
इस पूरे प्रकरण ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कोई संपत्ति विवाद न्यायालय में विचाराधीन हो, तो पुलिस की भूमिका आखिर क्या होनी चाहिए? आम तौर पर पुलिस का दायित्व कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी पक्ष की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई करना है, जबकि संपत्ति के मालिकाना हक और कब्जे से जुड़े अंतिम विवाद का फैसला सक्षम न्यायालय करता है।
महिला के आरोप सही हैं या नहीं, यह निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। ऐसे में स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष की मांग है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और यदि आरोपों में सत्यता मिलती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। सवाल यही है कि क्या पीड़ित महिला को न्याय मिलेगा और क्या पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी?
