फतेहपुर में 5 रुपये की टॉफी पर मां का खौफनाक कदम, 5 साल के मासूम के पैर गर्म चाकू से दागने का आरोप
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से मासूम बच्चे के साथ कथित क्रूरता का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि महज 5 रुपये की टॉफी खाने से नाराज मां ने अपने पांच वर्षीय बेटे के साथ बेरहमी की हद पार कर दी। महिला पर आरोप है कि उसने मासूम के पैरों के तलवों को गर्म चाकू से दाग दिया। इसके बाद बच्चे को कमरे में बंद कर वह कथित तौर पर खुद बर्थडे पार्टी में चली गई।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। मासूम के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है।
टॉफी खाने पर बच्चे को दी कथित सजा
मिली जानकारी के अनुसार, पांच साल के मासूम ने कथित तौर पर 5 रुपये की टॉफी खा ली थी। इसी बात को लेकर उसकी मां नाराज हो गई। आरोप है कि गुस्से में महिला ने बच्चे के पैरों के तलवों को गर्म चाकू से दाग दिया।
इतने छोटे बच्चे के साथ इस तरह की कथित क्रूरता की बात सामने आने के बाद परिवार और आसपास के लोगों में आक्रोश का माहौल है। घटना के दौरान मासूम किस स्थिति से गुजरा होगा, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके पैरों के तलवों को कथित तौर पर गर्म चाकू से दागे जाने की बात सामने आई है।

कमरे में बंद कर पार्टी में जाने का आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि बच्चे को कथित रूप से प्रताड़ित करने के बाद उसे कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद आरोपी मां के खुद बर्थडे पार्टी में चले जाने की बात कही जा रही है।
यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल बच्चे के साथ मारपीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मासूम को कमरे में बंद करने और उसकी सुरक्षा को खतरे में डालने का पहलू भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
पिता की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा
घटना के संबंध में मासूम के पिता ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी मां के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि बच्चे के साथ वास्तव में क्या हुआ, उसे किस तरह चोट पहुंचाई गई और घटना के पीछे पूरा विवाद क्या था। इसके साथ ही बच्चे के बयान और चिकित्सकीय जांच समेत अन्य साक्ष्यों को भी मामले में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
मासूम की सुरक्षा सबसे अहम
इस घटना ने बच्चों के साथ होने वाली हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच वर्ष की उम्र में बच्चा अपने माता-पिता पर पूरी तरह निर्भर रहता है। ऐसे में उसके साथ किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा उसके शारीरिक और मानसिक विकास पर गंभीर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि बच्चों को अनुशासन सिखाने के नाम पर हिंसा का सहारा लेना उचित नहीं है। किसी छोटी गलती पर बच्चे को समझाना और उसकी बात सुनना जरूरी है, न कि उसके साथ शारीरिक क्रूरता करना।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल पुलिस द्वारा दर्ज शिकायत और सामने आए आरोपों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। आरोपी महिला के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
फतेहपुर की यह घटना सामने आने के बाद लोगों में चर्चा है कि बच्चों के साथ किसी भी तरह की हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मासूम की सुरक्षा, इलाज और मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है।
पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह स्पष्ट होगा कि घटना की पूरी परिस्थितियां क्या थीं और बच्चे के साथ कथित रूप से हुई क्रूरता के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत क्या कार्रवाई होती है।

