नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही, 669 तक पहुंचा मौत का आंकड़ा, हजारों लोग लापता; भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
काठमांडू/नेपाल। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ के बाद कई गांव, सड़कें, पुल, जलविद्युत परियोजनाएं और अन्य बुनियादी ढांचे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। शनिवार 29 अगस्त तक मृतकों का आंकड़ा 669 तक पहुंच गया है, जबकि करीब 3,000 लोगों के अब भी लापता होने की खबर है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मुश्किल पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए विशेष टीमों को लगाया गया है।
मलबे और सुरंगों में जिंदगी की तलाश
नेपाल सरकार के अनुसार, आपदा के बाद हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। शनिवार को जारी नेपाली विदेश मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक 4,450 से अधिक लोगों को बचाया गया है, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। वहीं करीब 2,400 लोग अभी भी लापता बताए गए थे और आंकड़ों का सत्यापन जारी है। बाद की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या करीब 3,000 तक बताई गई है। नेपाल सरकार ने साफ किया है कि राहत-बचाव अभियान जारी रहने के साथ आंकड़ों में बदलाव संभव है।
सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को खोजने की है जो मलबे और सुरंगों में फंस गए हैं। कई इलाकों में सड़क और पुल बह जाने के कारण बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। ऊंचे पहाड़ों, संकरी घाटियों और भारी मलबे ने रेस्क्यू ऑपरेशन को और कठिन बना दिया है।

भारत ने भेजी विशेष बचाव टीम
नेपाल की मदद के लिए भारत ने भी विशेष सहायता भेजी है। नेपाल सरकार के मुताबिक भारत की ओर से 11 सदस्यीय विशेषज्ञ तकनीकी टीम को सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजा गया है। इसके अलावा भारत से राहत सामग्री की बड़ी खेप भी नेपाल पहुंच चुकी है। नेपाली विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत से अब तक 57 टन से अधिक राहत सामग्री प्राप्त हुई है। चीन समेत कई अन्य देशों ने भी राहत और तकनीकी सहायता की पेशकश की है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार जानकारी साझा की है। कई भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि कुछ अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। भारतीय टीमें बचाव, फोरेंसिक पहचान और सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने जैसे विशेष अभियानों में सहयोग कर रही हैं।
एक और बाढ़ का खतरा, निगरानी बढ़ाई गई
इस प्राकृतिक आपदा के बाद अब नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में एक और संभावित खतरे पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ के कारण बनी झील और जलस्तर को लेकर विशेषज्ञों और प्रशासन की निगाह बनी हुई है। अधिकारियों ने नदी तंत्र और निचले इलाकों में अतिरिक्त बाढ़ के जोखिम की लगातार निगरानी शुरू कर दी है। फिलहाल बचाव एजेंसियां किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।
तबाही के बाद पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती
नेपाल सरकार के सामने अब सिर्फ लोगों को बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि तबाह हुए बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। बाढ़ में सड़कें, पुल, मकान और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। नेपाली अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पड़ सकती है।
नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विदेशी सहायता को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। जरूरत के अनुसार सुरंग बचाव, जीवित लोगों का पता लगाने वाली तकनीक, फोरेंसिक और डीएनए जांच तथा शवों की पहचान जैसी विशेषज्ञ सहायता मांगी जा रही है। सरकार ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक रूप से सत्यापित जानकारी को ही आगे बढ़ाएं।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। लापता लोगों के परिजनों की उम्मीदें बची हुई हैं और रेस्क्यू टीमें मलबे, सुरंगों तथा दुर्गम इलाकों में लगातार जिंदगी की तलाश कर रही हैं। आने वाले घंटों में मृतकों, लापता लोगों और सुरक्षित निकाले गए नागरिकों की संख्या में बदलाव संभव है।

