सिंगाही लखीमपुर खीरी से निकली तिरंगा कावड़ यात्रा तिरंगा कांवड़ यात्रा में दिखा देशभक्ति और आस्था का अनोखा संगम, जगह-जगह हुआ कांवड़ियों का भव्य स्वागत
सावन के पावन महीने में भगवान शिव की भक्ति से पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है। इसी बीच तिरंगा लेकर निकली कांवड़ यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ देशभक्ति की भावना को भी एक नया रंग दे दिया। यात्रा में शामिल कांवड़ियों के हाथों में लहराता राष्ट्रीय ध्वज और भगवान भोलेनाथ के जयकारों ने पूरे वातावरण को उत्साह और श्रद्धा से भर दिया। रास्ते में जगह-जगह स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों का स्वागत किया और उनके लिए जलपान व पेयजल की व्यवस्था की।
कांवड़ियों के जत्थे सिंगाही खुर्द स्थित हनुमान मंदिर,
संहिजना स्थित शिव मंदिर और सिद्ध बाबा मंदिर सिंगाहीखुर्द से रवाना हुए । ये सभी कांवड़िये निघासन के मोटेबाबा मंदिर पहुंचे, जहां से पवित्र जल भरकर उन्होंनेभगवान शिव के जलाभिषेक के लिए अपने गंतव्य कीओर प्रस्थान किया।यात्रा में प्रधान पद के प्रत्याशी श्याम मोहन दीक्षित औरवीरेंद्र निषाद सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक तथाबड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने भगवानभोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए अपनी उपस्थिति दर्जकराई।

तिरंगा कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना के साथ देश के प्रति सम्मान और गौरव का संदेश देते नजर आए। यात्रा के दौरान कांवड़ियों के हाथों में तिरंगा दिखाई दिया, जिससे धार्मिक आयोजन के बीच देशभक्ति का भाव भी प्रमुखता से नजर आया। श्रद्धालुओं के इस अंदाज ने स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित किया और कई स्थानों पर लोगों ने कांवड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
सावन के दौरान भगवान शिव के भक्त कांवड़ यात्रा निकालते हैं। श्रद्धालु पवित्र जल लेकर शिवालयों की ओर प्रस्थान करते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसी परंपरा के बीच इस बार तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल हुए कांवड़ियों ने धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रप्रेम का संदेश देने का प्रयास किया।
रास्ते में जगह-जगह हुआ स्वागत
यात्रा के गुजरने वाले मार्गों पर स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कई स्थानों पर कांवड़ियों के लिए पीने के पानी और जलपान की व्यवस्था की गई। गर्मी और लंबी दूरी की यात्रा के बीच ऐसी व्यवस्थाओं से कांवड़ियों को काफी राहत मिली।
स्थानीय लोगों का कहना रहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी अवसर बनती है। जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ यात्रा करते हैं तो रास्ते में रहने वाले लोग भी अपनी ओर से सेवा करने के लिए आगे आते हैं। इसी भावना के तहत कई जगहों पर कांवड़ियों को पानी पिलाया गया और उनका स्वागत किया गया।

भगवान शिव की भक्ति के साथ राष्ट्रप्रेम का संदेश
यात्रा में शामिल कांवड़ियों ने बताया कि सावन में भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक के लिए यात्रा निकालना उनके लिए आस्था का विषय है। वहीं तिरंगा साथ लेकर चलने के पीछे देश के प्रति सम्मान और गौरव की भावना भी जुड़ी है।
कांवड़ियों के मुताबिक तिरंगा देश की एकता और सम्मान का प्रतीक है। इसलिए भगवान शिव की भक्ति के साथ राष्ट्रीय ध्वज लेकर चलना उनके लिए गर्व की बात है। यात्रा के दौरान धार्मिक जयकारों के साथ तिरंगे ने माहौल को अलग ही रंग दे दिया।
पूरे क्षेत्र में बना भक्तिमय माहौल
तिरंगा कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां लोगों की नजर कांवड़ियों और तिरंगे पर टिक गई। भगवान भोलेनाथ के जयकारों और देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंजता रहा।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि की कामना भी की। कांवड़ियों की भक्ति और उत्साह को देखकर स्थानीय लोगों में भी धार्मिक आयोजन को लेकर उत्साह नजर आया।
विशाल तिरंगा यात्रा का प्रमुख आकर्षण बना रहा। कांवड़ियों के समूह में लहराते राष्ट्रीय ध्वज ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और राष्ट्रप्रेम एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यात्रा में शामिल लोगों ने श्रद्धा, अनुशासन और भाईचारे के साथ आगे बढ़ते हुए माहौल को यादगार बना दिया।
सेवा भाव ने बढ़ाई यात्रा की शोभा
कांवड़ यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों की ओर से की गई सेवा भी चर्चा का विषय रही। अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और जलपान की व्यवस्था की गई। लोगों ने कांवड़ियों को रोककर पानी पिलाया और उनका स्वागत किया।
सावन के दौरान निकलने वाली कांवड़ यात्राओं में सेवा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए लोग अपने स्तर पर व्यवस्थाएं करते हैं। इस तिरंगा कांवड़ यात्रा में भी यही सेवा भावना देखने को मिली।
कुल मिलाकर तिरंगा कांवड़ यात्रा ने आस्था, सेवा, भाईचारे और देशभक्ति का संदेश दिया। भगवान शिव की भक्ति में आगे बढ़ते कांवड़ियों और उनके हाथों में लहराते तिरंगे ने पूरे क्षेत्र में अलग तरह का उत्साह पैदा किया। यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों का सहयोग और श्रद्धालुओं की आस्था ने आयोजन को खास बना दिया।
