कालीघाट मंदिर में पारंपरिक मछली और बासंती पुलाव का भोग ग्रहण करते शुभेंदु अधिकारी।कालीघाट मंदिर में पारंपरिक मछली और बासंती पुलाव का भोग ग्रहण करते शुभेंदु अधिकारी।

कालीघाट मंदिर में शुभेंदु अधिकारी ने खाया मछली का भोग, बागेश्वर बाबा के बयान के बाद बढ़ा विवाद

कोलकाता, 12 सितंबर 2026। पश्चिम बंगाल की राजनीति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को कौशिकी अमावस्या के अवसर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने मां काली की पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर की परंपरा के अनुसार मछली और बासंती पुलाव का भोग ग्रहण किया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद बागेश्वर बाबा के हालिया मांसाहार संबंधी बयान को लेकर चल रही बहस और तेज हो गई है।

कालीघाट मंदिर में क्या हुआ?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 सितंबर 2026, गुरुवार की शाम शुभेंदु अधिकारी कौशिकी अमावस्या के मौके पर कालीघाट मंदिर पहुंचे। उन्होंने मां काली के दर्शन और पूजा की। इसके बाद मंदिर में परोसे जाने वाले पारंपरिक भोग को ग्रहण किया। रिपोर्टों के मुताबिक भोग में मछली, मछली का सिर और बासंती पुलाव शामिल था। अधिकारी को मंदिर परिसर में बैठकर यह भोग ग्रहण करते हुए देखा गया।

कालीघाट मंदिर की धार्मिक परंपराओं में मछली सहित कुछ मांसाहारी भोग का विशेष स्थान बताया जाता है। इसलिए अधिकारी की ओर से मछली का भोग ग्रहण करना केवल भोजन का मामला नहीं, बल्कि बंगाल की स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

दरअसल, इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर बाबा के नाम से जाना जाता है, का हालिया बयान है। पश्चिम बंगाल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बंगाली हिंदुओं से दुर्गापूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से बचने की अपील की थी। उनके बयान के बाद बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक बहस शुरू हो गई।

रिपोर्टों के अनुसार, शास्त्री के बयान को लेकर कांग्रेस की ओर से पुलिस में शिकायत भी की गई। इसके बाद मामला और राजनीतिक हो गया। दूसरी ओर, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के नेताओं ने बंगाल की पारंपरिक खान-पान संस्कृति का समर्थन किया।

शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?

कालीघाट मंदिर में पूजा के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि किसी संत या धार्मिक व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन उसे मानना या नहीं मानना लोगों की अपनी इच्छा है। उन्होंने अपने धार्मिक आचरण का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग अवसरों पर उनकी भोजन संबंधी परंपराएं अलग हो सकती हैं।

कालीघाट मंदिर में पारंपरिक मछली भोग ग्रहण करने के बाद शुभेंदु अधिकारी चर्चा में हैं। यह घटनाक्रम बागेश्वर बाबा के मांसाहार संबंधी बयान के बाद सामने आया है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बंगाली समाज की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। इसी बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने भी कहा कि बंगाल के लोग अपनी पारंपरिक खान-पान की आदतों को जारी रखेंगे।

मामला सिर्फ मछली खाने तक सीमित नहीं

शुभेंदु अधिकारी के कालीघाट मंदिर में मछली का भोग ग्रहण करने के बाद यह विवाद अब धार्मिक परंपरा, व्यक्तिगत पसंद और बंगाली सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी बहस बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 10 सितंबर 2026 को कालीघाट मंदिर में हुआ यह घटनाक्रम बागेश्वर बाबा के मांसाहार संबंधी बयान के बाद चल रही बहस के बीच हुआ, लेकिन अधिकारी ने इसे मुख्य रूप से कालीघाट की पारंपरिक पूजा और कौशिकी अमावस्या से जोड़ा।

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By LAVKUSH KUMAR MAURYA

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